शमशान भैरवी साधना एक शक्तिशाली साधना –

शमशान भैरवी साधना एक बहुत ही शक्तिशाली साधना है जिसके द्वारा साधक जो चाहे प्राप्त कर सकता है तथा माँ भैरवी की कृपा भी सदैव अपने साधक की हर प्रकार से रक्षा करती है किन्तु साधना से पूर्व साधना के बारे में पूरी जानकारी होना अति आवश्यक है नहीं तो बहुत बड़ी अनिष्टता का भी सामना करना पड़ सकता है अतः किसी गुरु के सानिध्य में ही साधना को पूर्ण करना चाहिए और एक रक्षा मन्त्र को भी साधना से पूर्व सिद्ध कर लेना चाहिए |

शमशान भैरवी साधना एक बहुत ही तीव्र और शक्तिशाली साधना है 

शमशान भैरवी साधना विधि 

शमशान भैरवी एक संहारक शक्ति है | यह काली का ही एक रूप है, इसका साधक इसकी सिद्धि के बाद संसार के सभी भोगो को प्राप्त कर सकता है | यह साधक को कामिनी , सुरा, भोग तो देती ही है साथ ही समस्त शत्रुओं को भी नष्ट करती है | इस के अनियंत्रित रहने पर साधक दरिद्र हो जाता है और उस पर शत्रुओं का प्रकोप होता है , भारतीय ज्योतिष के अनुसार इसको शनि ग्रह के रूप में माना जाता है, इसलिए साधक को पूर्ण आस्था और नियमो के साथ ही इस साधना को किसी योग्य गुरु के सानिध्य में ही करना चाहिए |

स्थान –  शमशान

समय – अर्धरात्रि , अमावस की रात या शनि की रात से शुरू करें तथा कृष्णपक्ष में ही साधना शुरू करें |

दिशा – दक्षिण

सामग्री – यह एक तामसिक साधना है इसके लिए जिन सामग्रियों की आवश्यकता होगी वो इस प्रकार है – मदिरा (देशी शराब ),मांस (बकरे का या काले मुर्गे का ), स्त्री के बाल , भैंस का घी,भैंस के गोबर का कंडा (उपला ),सरसों का तेल , सरसों या राई ,काले तिल, जौ, कपूर, लाल चन्दन, लाल कपडा खोपड़ी, सिन्दूर कुमकुम आदि |

साधना विधि – शमशान भैरवी साधना शत्रुओं के संहार या अपनी मनोवांछित इच्छाओं की पूर्ति के लिए की जाती है | वस्तुतः साधक की भोग सामग्री वो होती है जो उसके साधना के लिए आवश्यक होती है इसमें कामिनी भी हो सकती है या मदिरा भी  पर इस समय साधक का उद्देश्य भोग नहीं होता | बहुत तांत्रिक यह मान लेते है कि शमशान भैरवी से सांसारिक भोग ही प्राप्त किये जा सकते है ऐसा है भी पर इस भोग सामग्री की सहज उपलब्धता ही उसे भोग में ऐसा गर्त करती है की वह आदमी ही नहीं रहता तो साधक क्या बनेगा ऐसे लोग विनष्ट हो जाते है |

शमशान भैरवी साधना दक्षिण की ओर मुख करके की जाती है तथा अर्धरात्रि में चिता के सामने बैठकर यह साधना की जाती है शमशान की चिता इस साधना में आवश्यक है और पूर्ण तरह से नग्न होकर यह साधना की जाती है |

सर्वप्रथम आसन को तेल सिन्दूर से घेरा बना कर अभिमंत्रित करके सुरक्षा घेरा बनाया जाता है इसलिए इस साधना से पूर्व रूद्र को सिद्ध कर लेना अति आवश्यक होता है तब सभी साधनाएं आसानी से सिद्ध हो जाती है |

घेरे में खोपड़ी को रखकर उसके बीच में सिंदूर लगाए फिर उसके सामने भैरवी चक्र बनाएं ये तीन प्रकार से बनाया जाता है इसको भी सिंदूर से ही बनाया जाता है इसके मध्य में दीपक प्रज्वलित करें और शमशानी भैरवी की साधना के लिए पहले शमशान भैरवी की पूजा करें तत्पश्चात मदिरा मांस खीर फूल आदि समर्पित करें और अपनी साधना के लिए माँ से आशीर्वाद लें तथा इससे पूर्व अपने गुरु का ध्यान करें जोकि अति आवश्यक है |

इस चिता के पास मन्त्र जाप करने का क्रम इक्कीस रात चलता है | इसके लिए चिता की आग तांदी नहीं होनी चाहिए ,और मन्त्र जाप के साथ साथ ध्यान भी लगा रहना चाहिए तभी साधना में सफलता प्राप्त होती है, चिता की राख और कोयला भी रखते रहना चाहिए |

विशेष-

  • सभी सावधानियां पूर्ववत रखनी चाहिए |
  • यह साधना सामान्य लोगो के लिए नहीं है, यह साधना वही कर सकता है जो की गुरु शिष्य परम्परा में पहले ही कई साधनाएं कर चुका है साधरण व्यक्ति को इन सबसे दूर ही रहना चाहिए |
  • इसमें प्रकट होने से पूर्व देवी कई रूपों में सामने आती है या आसपास अनुभव होती है , यह भयावह से मोहिनी तक हो सकती है | डरना या लोभ में नहीं पड़ना चाहिए और अपने मन को स्थिर रखना चाहिए |
  • साधना के समय उपवास रखना चाहिए , साधना के समय सुबह को हल्का आहार लेना चाहिए तथा पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए |
  • सिर के बाल खोलकर रखना चाहिए |
  • यह साधना रात्री ग्यारह बजे से उषाकाल तक की जाती है |

शमशान भैरवी मन्त्र –

“शमशान भैरवी नरुधिरास्थी- वसा भक्षिनी सिद्धिम में देहि मम मनोरथम पूरय हुम् फट स्वाहा  ||”

“शमशान भैरवी नरुधिरास्थी-वसा भक्षिनी सिद्धिम में देहि मम मनोरथम पूरय हुम् फट स्वाहा  ||”

शमशान भैरवी के प्रयोग –

जब शमशान भैरवी प्रसन्न होकर प्रकट होती है और दर्शन देती है और साधक से मनोरथ पूछती है तो उनसे तीन वर मांगे , पहला यह की वह सदा आपके बुलावे पर आयेगी , सदा आपकी कामना की पूर्ति करेगी और कभी भी आपको हानि नहीं पहुंचाएगी | इसके बाद जब भी आवशयकता हो , निम्नानुसार प्रयोग करें –

  1. (अ)शत्रुओं एवं विघ्नों के नाश के लिएकिसी कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को किसी निर्जन स्थान में खैर की लकड़ी जलाकर राई नमक और चिता के कोयले को मिला दें और उससे 1188 आहुति मन्त्र जाप करते हुए दें | शमशान भैरवी का ध्यान भी करना आवश्यक है |(बी) कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शमशान में चिता की हड्डी लेकर भैरवी चक्र बनाएं इस चक्र में शत्रु का नाम लिख कर भैंसे के बाल घी कपूर राई एवं नमक की आहुति चिता में दें इससे शत्रु का या विघ्नों का नाश हो जाता है |
  2. उच्चाटन हेतु – किसी चिता की अग्नि में 108 मन्त्र पढ़कर कौए के पंखो की आहुति दें और इस राख को इसी मन्त्र से अभिमंत्रि करके रख लें , तीन बार मन्त्र से अभिमंत्रित करके जिसके ऊपर फेकेंगे उसका उच्चाटन होता है |
  3. विद्वेषण-नीम की पत्ती कौए के पंख और नमक से चिता की अग्नि में जिन लोगों का नाम पढ़कर आहुति देंगें उनमे तो उनमे आपस में विद्वेषण उत्पन्न हो जायेगा |

मोहन-  जिसको भी वश में करना है उसके बालो को अपने बालो से मिला कर चमेली के फूल और लोंग मिलकर उपले की अग्नि में आहुति देने से वो वश में हो जाता है |इसके अलावा दूसरी विधि अनुसार अगर किसी के उतरे हुए कपडे पर हाथ रखकर देवी के मन्त्रों का जाप किया जाये तो वो इन्सान स्त्री या पुरुष साधक के वश में हो जाता है |

ये शमशान भैरवी साधना केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखी गई है अतः पाठक  केवल जानकारी के लिए ही इसको पढ़े |

पोस्ट पर आने के लिए धन्यवाद् आगे भी आपके साथ नयी जानकारियां लेकर आऊंगा कृपया  मेरा मार्गदर्शन करते रहे |

 

 

 

 

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