Batuk Bhairav Sadhna (Vidhi ek upyogi aur mahatavpurn sadhna)

बटुक भैरव साधना विधि (एक उपयोगी और महत्वपूर्ण साधना) 

निर्भयता प्रदान और सुरक्षा प्रदान करने वाले भगवान बटुक भैरव नाथ

बटुक भैरव साधना विधि में आज हम आपको बताएंगे की आप बटुक भैरव जी की साधना करके अपने जीवन की समस्याओं को दूर करके कैसे एक अच्छा और सुखमय जीवन जी सकते है और अपने परिवार स्वयं को कैसे बुरी शक्तियों से बचा सकते है और जीवन में आगे बढ़ सकते है |

 

श्री भैरव जी भगवान् शंकर जी के ही प्रतिरूप हैं ऐसा पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है | भैरव शमशान वासी हैं ये भूत प्रेत के अधिपति है तथा दुष्टो का संहार करने में सदैव तत्पर रहते हैं | भैरव नाथ जी के कई रूप है जिनमे काल भैरव और बटुक भैरव मुख्य हैं | भैरव जी के अन्य रूपों में अष्ट भैरव आते है जोकि निम्न प्रकार से है

    अति सांग भैरव  
    चण्ड भैरव 
    भयंकर भैरव 
    क्रोधोन्मत्त भैरव 
    भीषण भैरव 
    संहार भैरव 
    कपाली भैरव 
    रुरु भैरव
 
शिवजी के प्रकारान्तर से निम्न रूप भी भैरव के माने जाते हैं -

१ क्षेत्रपाल, २  दंडपाणि, ३  नीलकंठ,  ४ मृत्युंजय, ५  मंजुघोष, ६  ईशान,  ७ चण्डेश्वर,  ८ दक्षिणामूर्ति,  ९ अर्धनारीश्वर 

    इनके अतिरिक्त प्रचलित कथाओ के आधार पर देवी माता के जोभी सिद्ध पीठ हैं वह पर भैरव जी जरूर विराजते हैं, विकराल रूप होते हुए भी भैरव जी अपने भक्तों के प्रति  बहुत ही दयालु हैं और उनका हर विपरीत परिस्तिथि में साथ देते है इसलिए उनकी साधना बड़ी मंगलकारी है प्रत्येक व्यक्ति को उनकी उपासना और साधना जरुर करनी चाहिए जिससे सुखी जीवन प्राप्त किया सके और जीवन को सही दिशा दी जा सके | 

 बटुक भैरव साधना विधि से प्राप्त होने वाले लाभ 

१  -इस साधना से साधक पर भैरव जी की किरपा सदैव ही बनी रहती है जिस कारण वो मुसीबतों से बचा रहता है | 
  
२ -भैरव साधना करने वाले पर कोई भी जादू टोना टोटका और बुरी शक्तियों का प्रभाव नहीं होता | 

३ -साधक के अलावा उसके परिवार की नहीं रक्षा भैरव नाथ जी करते है | 

४ -वाक् सिद्धि , वशीकरण सिद्धि, सर्वकार्ये सिद्धि साधक इस साधना से प्राप्त कर सकता है | 

५ -स्तम्भन, ग्रह पीड़ा निवारण नजर, निवारण प्रेत व्याधि का उपाय साधक स्वयं ही कर सकता है | 

६ - इसके अतिरिक्त अगर साधक मन लगाकर पूर्ण निष्ठां के साथ इस साधना को करता है तो भैरव जी स्वयं साधक को स्वपन के माध्यम से या प्रत्यक्ष रूप से दर्शन भी देते है और वरदान भी प्रदान करते है| 

७ - जीवन के में उन्नति और धन प्राप्ति के लिए भी भैरव जी की साधना की जाती है जिससे की जीवन में धन आगमन के नए स्त्रोत खुलते है | 

८-भैरव साधना करने हमेशा निर्भय जीवन जीते है तथा शत्रुओं का कोई भय साधक को नहीं रहता है |

बटुक भैरव साधना विधि को कोई भी साधक अपने घर में ही पूर्ण कर सकता है क्यूंकि ये एक सात्विक साधना है, जिसको कोई भी स्त्री या पुरुष कर सकता है और भैरव जी की किरपा प्राप्त कर सकता है | 

उपासना की विधि 

भैरव उपासना साधना किसी भी अष्टमी या शनिवार से आरम्भ कर सकते हैं भले ही वह शुक्ल पक्ष की अष्टमी हो या कृष्ण पक्ष की, भैरव जी के मन्त्र के साथ चालीसा और स्तोत्र का पाठ भी करना चाहिए, साधक शुरू में कम मंत्रो का संकल्प भी ले सकता है, वैसे ग्यारह दिनों में सवा लाख मंत्रो का जाप से पूर्ण सिद्धि प्राप्त होती है अगर कोई इकत्तीस हजार मंत्रो का संकल्प भी किसी कार्य सिद्धि के लिए लेता है तो भी साधक की मनोकामना जरुर पूर्ण होती है |

साधना पूर्ण निष्ठां और सच्चे मन से होनी चाहिए तथा साधना के साधना के समय किसी भी प्रकार का व्यभिचार, मॉस मदिरा का सेवन नहीं करना है और पूर्ण ब्रह्मचर्या का पालन करना है तथा सात्विक भोजन करना है , साधना काल  में जितना हो सके साधक को मौन रहना है जरुरी होने पर ही बोलना है किस से फालतू की बाते नहीं करनी है और शुद्धता का ध्यान रखना है | 

बटुक भैरव जी को भोग में उरद की दाल के बड़े, पकौड़े , भुजिआ ,शहद , मेवा डालकर बनाई गई खीर पूड़ी कचौड़ी सब्जी पापड़ सलाद लड्डू तथा लोग का जोड़ा चढ़ाना चाहिए | 

बटुक भैरव साधना विधि के लिए एक लकड़ी के बाजोट पर काला या लाल रंग का कपडा बिछा लें तथा उस पर बटुक भैरव जी का चित्र या फिर शंकर भगवान् का चित्र स्थापित कर दें उन पर फूल माला अर्पित करें एक सरसो के तेल या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें, लोंग कपूर गूगल  मिश्रित धुप जलाएं सिंदूर का तिलक लगाएं चन्दन अर्पित करें ,याद रखे भैरव जी की साधना में गूगल लोबान और सिंदूर का बहुत महत्व होता है , जाप आप रुद्राक्ष की माला से करेंगे इसमें रुद्राक्ष की माला ही सर्वश्रेष्ठ मणि गई है |

अब नमः शिवाय बोलकर हाथ धो लें 

एक बारी गंगा जल सभी और छिड़क दे 

अब पांच या सात बार प्राणायाम करें इसके बाद जिस कार्य के लिए साधना करनी है उसके लिए दाएं हाथ में जल और थोड़े से चावल ( अक्षत ) लेकर संकल्प लें,
  
संकल्प में अपना नाम अपने पिता का नाम अपने गौत्र का नाम जन्मस्थान का नाम लेकर तथा जिस अपनी कामना और मनोरथ बोलकर जितने मंत्रो का जाप करना है उतना बोलकर जल और चावल को भूमि पर छोड़ दें |  

अब सबसे पहले गणेश जी का पूजन करे तिलक लगाए दुबड़ा घास चढ़ाएं लड्डू का भोग लगाएं तथा गालपति जी का श्लोक और ध्यान करते हुए गायें 

ॐ गजाननं भूत गणाधिसेवतं कपितजम्बूफल चारु भक्षणं | 
उमासुतं शौक् विनाशकरकं नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम || 
 
अब गुरु पूजन करे अगर गुरु न हो तो शंकर भगवान् को गुरु मान कर गुरु पूजन को पूर्ण करे और उनसे साधना के लिए आशीर्वाद मांगे तथा प्रार्थना करे की साधना काल में मेरी रक्षा करें और साधना को पूर्ण करने के लिए मुझे ऊर्जा प्रदान करें,गुरु को फूल मिष्ठान और तिलक अर्पित करें और हाथ जोड़कर आशीर्वाद लें और निम्न मंत्रो का उच्चारण करें -

ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुविष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरा | 
गुरुर साक्षात् परबर्ह्म तस्मै श्री गुरवे नमः || 

ॐ गुं  गुरुभ्यो नमः   बाएं कंधे का स्पर्श करें 

ॐ गं गणपतये नमः  दाएं कंधे का स्पर्श करें 

ॐ भं भैरवाये नमः   बाईं जांघ का स्पर्श करें 

ॐ बं बटुकाय नमः   दाईं जांघ का स्पर्श करें 

ॐ नमः शिवाय अस्त्राये फट कहकर दाएं हाथ की हथेली से बाएं हाथ की कोहनी तक तथा बाएं हाथ की हथेली से दाएं हाथ की कोहनी तक स्पर्श करें | 

ॐ नमः शिवाय तीन बार कहकर तीन बार ताली बजाएं | 

करन्यास 


      ॐ ह्रीं नमः अंगुष्ठाभ्यां नमः | 

      ॐ बटुकाय तर्जनीभ्यां नमः | 
     
      ॐ आपदुद्धारणाय मध्यमाभ्यां नमः | 
      
      ॐ कुरु कुरु अनामिकाभ्यां नमः | 

      ॐ बटुकाय कनिष्ठाभ्यां नमः | 

      ॐ ह्रीं नमः शिवाय करतल कर पृष्ठाभ्यां नमः | 

ह्रदय न्यास 

       ॐ ह्रीं बटुकाय ह्रदयाये नमः | 

       ॐ आपदुद्धारणाय शिरसे स्वाहा | 
     
      ॐ कुरु कुरु बटुकाय शिखाये वौषट | 

      ॐ ह्रीं कवचाय हुम् | 

      ॐ नमः शिवाय नेत्रत्र्याये  वौषट | 

      ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय करू कुरु बटुकाय ॐ ह्रीं नमः शिवाय अस्त्राय फट |


अक्षर न्यास 

    ॐ ह्रींग नमः शिखायाम | 

    ॐ ह्रीं नमः बटुकाय नमः दक्षिणनेत्रे | 

    ॐ आपदः उद्धारणाय नमः वामनेत्रे | 

    ॐ कुरु कुरु नमः दक्षिण कर्णें | 

    ॐ बटुकाय नमः वामकर्णे | 

    ॐ ह्रीं नमः दक्षिणनास पुटे | 

    ॐ ह्रीं नमः वामनासा पुटे | 

    ॐ नमः शिवाय मुखे | 

    ॐ नमः शिवाय गुह्ये | 


दिग न्यास 

       ॐ ह्रीं नमः प्राच्य नमः  (पूर्व दिशा में चुटकी बजाएं ) 

       ॐ बटुक आग्नेय नमः (अग्नि कोण में चुटकी बजाएं )

      ॐ आपदुद्धारणाय दक्षिणायै नमः ( दक्षिण में चुटकी बजाएं )

      ॐ कुरु कुरु नेऋत्य नमः (नैऋत्ये कोण मर चुटकी बजाएं )

      ॐ बटुकाय प्रतिच्ये नमः (पश्चिम दिशा में चुटकी बजाएं )

      ॐ बटुकाय वायव्यै नमः (उत्तर दिशा में चुटकी बजाएं )

      ॐ ह्रीं उदीच्यै नमः (उत्तर दिशा में चुटकी बजाएं )

     ॐ ह्रीं ऐशान्ये नमः (ईशान कोण में चुटकी बजाएं )

     ॐ ह्रीं शिवाय उर्ध्वाय नमः ( आकाश की तरफ चुटकी बजाएं )

    ॐ ह्रीं नमः भूम्यै नमः ( पृथ्वी की तरफ चुटकी बजाएं ) 



 मुख्य जाप मन्त्र -
                  

 "ॐ ह्रीं वं  बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं "


इस मन्त्र का पुरश्चरण सवा लाख का है पर कामनापूर्ति के लिए ३१ हजार का संकल्प भी ले सकते है तथा जाप का दशांश हवन, हवन का दशांश तर्पण  और तर्पण का दशांश मार्जन करना होता है यदि कोई साधक दशांश हवन  न कर पाए तो वो अपने सामर्थय अनुसार एक माला यानि १०८ आहुति दे सकता है और नित्य इस मन्त्र की एक माला करनी होगी जिससे मन्त्र का प्रभाव साधक के अंदर बढ़ता रहेगा और साधक की चेतना ऊधर्वगामी होगी जिससे साधक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उन्नति और सफलता को प्राप्त कर सकता है | 

साधना के पूर्ण होने पर पांच सात या ग्यारह लड़को को भोजन कराएं तथा नजदीक के भैरव मंदिर में भी प्रसाद चढ़ाएं तथा आशीर्वाद प्राप्त करें | 

   


मेरे पेज पर आने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद्  





                                       

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